राम-भरत मिलाप पर भावुक हुए श्रोता
कामता नाथ सिंह
नसीराबाद, रायबरेली।पछुआबारा गांव के बूढ़ी माता मंदिर में चल रही श्रीराम कथा आठवें दिन भरत चरित्र पर केंद्रित रही।अयोध्या धाम से पधारे विद्वान कथा व्यास धर्मेश हरि महाराज ने
भरत के ननिहाल से लौटने पर माता कैकेई के कृत्य पर उनके क्षोभ और पश्चाताप पर प्रकाश डाला।
उन्होंने भरत जी द्वारा माताओं, मंत्रियों और प्रजा के साथ प्रभु श्रीराम को मनाने के लिए चित्रकूट जाने, उनके विलक्षण प्रेम और राम-भरत की भावुक भेंट का वर्णन किया।
प्रभु श्रीराम द्वारा अयोध्या वापसी से इनकार करने पर उनकी चरण पादुका राज सिंहासन पर स्थापित करके 14 वर्ष तक सेवक की भांति शासन चलाने का ज़िक्र करते हुए कहा कि संपूर्ण विश्व में भ्रातृ प्रेम का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।
विद्वान कथा व्यास ने माता शबरी से भेंट और प्रभु श्रीराम द्वारा जूठे बेर खाने का प्रसंग भी सुनाया।
मुख्य यजमान संतोष सिंह भदौरिया,श्रीमती रेखा सिंह,आयुष सिंह,पीयूष सिंह, संजीव सिंह दीपू, रमाशंकर प्रसाद,सुरेन्द्र बहादुर श्रीवास्तव सहित सैकड़ो लोगों ने राम कथा मंदाकिनी में गोते लगाए।
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