सीता की विदाई और राम वनगमन के प्रसंग पर रो पड़े श्रोता।
कामता नाथ सिंह
परशदेपुर/नसीराबाद, रायबरेली। छतोह ब्लॉक के ग्राम पछुआबारा स्थित बूढ़ी माता मंदिर में चल रही श्रीराम कथा के सातवें दिन कथा वाचक धर्मेश हरि महाराज ने जनक पुर से सीता की विदाई एवं श्रीराम वनवास गमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया जिसे सुनकर श्रोताओं की आंखें बरबस बरस पड़ीं।
कथा व्यास ने बताया कि सीता स्वयंवर के बाद चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ। राम-सीता, भरत-मांडवी, लक्ष्मण-उर्मिला, शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति का विवाह हुआ। जनकपुर से बारात अयोध्या लौटी। पूरी अयोध्या ने दीवाली मनाई।
किन्तु कुछ दिनों बाद दासी मंथरा के बहकावे मेंआई कैकेई के कारण पूरा परिदृश्य बदल गया। राजा दशरथ से मांगे गए दो वर के बदले श्री राम को वन जाना पड़ा और भरत को राजगद्दी मिली। भाई राम के साथ जब लक्ष्मण और सीता जी के वन जाने का करुण पसंद सुनकर खचाखच भरे पंडाल में श्रोताओं की सिसकियां सुनाई पड़ने लगीं।
विद्वान तथा व्यास ने निषादराज के गंगा पार कराने,चित्रकूट में पर्ण कुटी बनाकर निवास करने,महाराज दशरथ के प्राण त्याग की कथा भी सुनाई।
मुख्य यजमान संतोष सिंह भदोरिया, श्रीमती रेखा सिंह, सुरेंद्र बहादुर श्रीवास्तव सहित सैकड़ो लोगों ने भावभरी श्रीराम कथा सुनी।
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