राम की बाल लीला सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु।

राम की बाल लीला सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु।
कामता नाथ सिंह 
डीह/नसीराबाद, रायबरेली। छतोह विकास क्षेत्र के पछुआबारा गांव में चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन विख्यात कथावाचक धर्मेंद्र हरि महाराज ने भगवान राम सहित चारों भाइयों की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार का प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
उन्होंने बाल अवस्था में प्रभु द्वारा माता कौशल्या को अपने विराट  चतुर्भुज रूप के दर्शन देने, माखन चुराने, सखियों के साथ खेलने, गुरु वशिष्ठ के आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने और खेल-खेल में राक्षसों का भय दूर करने का वर्णन करके श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। बीच-बीच में संगीत टोली द्वारा प्रस्तुत सरस गायन ने लोगों को आकर्षित किया तो प्रासंगिक झांकियों ने मन मोह लिया।
विद्वान कथा व्यास ने बताया कि जब प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण विश्वामित्र जी के साथ मिथिला जा रहे थे तो मार्ग में महर्षि गौतम का आश्रम पड़ा जो श्राप के कारण निर्जन और वीरान पड़ा था।महर्षि विश्वामित्र ने शापित अहिल्या की चर्चा की तो श्रीराम ने आश्रम में प्रवेश कर शिला रूपी अहिल्या को अपने चरणों से छूकर उसका उद्धार कर दिया। कथा व्यास धर्मेश हरि महाराज ने कहा कि जहाँ बाल लीला प्रभु की सुलभता और सरलता को दर्शाती है, वहीं अहिल्या उद्धार यह संदेश देता है कि भगवान अपने चरणों के स्पर्श से अज्ञान रूपी पत्थर को भी ज्ञान और मुक्ति में बदल देते हैं।
मुख्य योजना यजमान संतोष सिंह भदौरिया, श्रीमती रेखा सिंह,आयुष प्रताप सिंह, पीयूष प्रताप सिंह,रमाशंकर श्रीवास्तव, सुरेंद्र बहादुर श्रीवास्तव, मनोज द्विवेदी, श्याम बहादुर सिंह 'बबलू' आदि सैकड़ों श्रद्धालुओं ने राम कथा सुनकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

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