हरदोई: दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए भटकती रही, बच्चे पर तेजाब डालने का आरोप — पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल.

हरदोई: दुष्कर्म पीड़िता न्याय के लिए भटकती रही, बच्चे पर तेजाब डालने का आरोप — पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
जनपद हरदोई के शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने पति और पति के मामा नईम पर दुष्कर्म, प्रताड़ना और मासूम बच्चे पर तेजाब डालकर जलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि शिकायतों और साक्ष्यों के बावजूद पुलिस स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

पीड़िता, जो काशीराम कॉलोनी ब्लॉक नंबर-40, कमरा नंबर-477, कस्बा शाहाबाद की निवासी बताई जा रही है, का कहना है कि उसके पति जावेद तथा उसके मामा नईम द्वारा लंबे समय से मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। महिला के अनुसार इस संबंध में पहले भी कई बार पुलिस में शिकायत दी गई थी।
बताया गया कि दिनांक 19 अप्रैल को थाना टनियावा में एफआईआर संख्या 237 दर्ज कराई गई तथा 22 मार्च 2026 को थाना शाहाबाद में भी प्रकरण दर्ज हुआ, लेकिन आरोप है कि दोनों मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़िता के बयान के अनुसार 24 अप्रैल 2026 की रात लगभग 8 बजे, जब उसके माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे, उसी दौरान आरोपी नईम उसके घर पहुंचे और जबरन सुलह का दबाव बनाने लगे। महिला द्वारा सुलह से इंकार करने पर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया है।

मामले को और गंभीर बनाते हुए पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके पति जावेद ने अपने ही लगभग एक वर्षीय बच्चे पर तेजाब डालकर उसे जला दिया। महिला का दावा है कि घटना से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी उसके पास मौजूद हैं।

मामला जब जनपद के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा तक पहुंचा तो उन्होंने संज्ञान लेते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस और आरोपियों की कथित मिलीभगत के चलते आरोपियों को केवल धारा-151 में चालान कर छोड़ दिया गया।

पीड़िता का कहना है कि उसने दोबारा पुलिस अधीक्षक से मिलकर न्याय की गुहार लगाई। आरोप है कि पीड़िता द्वारा दिए गए मूल प्रार्थना पत्र पर एफआईआर दर्ज करने के बजाय थाना स्तर पर नया प्रार्थना पत्र तैयार कर उस पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा है। महिला का स्पष्ट कहना है कि उसके साथ हुए वास्तविक अपराधों पर ही एफआईआर दर्ज की जाए।

लगातार न्याय के लिए भटक रही पीड़िता ने आर्थिक तंगी और असुरक्षा की स्थिति का भी हवाला दिया है। उसका कहना है कि कार्रवाई न होने के कारण वह दर-दर भटकने और भीख मांगने तक को मजबूर हो गई है।

यह मामला अब पुलिस कार्यप्रणाली, महिला सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।

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