महिला लेखपाल–तत्कालीन एसडीएम विवाद के बाद न्यायिक कार्य के बहिष्कार पर हाईकोर्ट सख्त, 15 दिन में स्पष्टीकरण देने के निर्देश
हरदोई। शाहाबाद बार एसोसिएशन द्वारा न्यायिक कार्य के बहिष्कार और हड़ताल किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने शाहाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष समेत 22 अधिवक्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जिला न्यायाधीश के माध्यम से अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह मामला उस समय का है, जब शाहाबाद के तत्कालीन एसडीएम सुशील कुमार मिश्रा और महिला लेखपाल पूजा देवी वर्मा के बीच एसडीएम कार्यालय में विवाद हुआ था। महिला लेखपाल एक अधिवक्ता की पुत्री हैं। घटना के बाद स्थानीय अधिवक्ताओं ने विरोध स्वरूप एसडीएम के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की और उनके न्यायालय का बहिष्कार करते हुए हड़ताल शुरू कर दी थी।
बताया जाता है कि शाहाबाद बार एसोसिएशन की ओर से न्यायालय बहिष्कार का एक औपचारिक नोटिस भी जारी किया गया था। तत्कालीन एसडीएम ने उक्त नोटिस को न्यायालय भेज दिया, जिसके आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया।
हाईकोर्ट ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों के अनुसार अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्य का बहिष्कार और हड़ताल करना विधि एवं न्यायिक व्यवस्था के विरुद्ध है। इसी आधार पर अध्यक्ष सहित 22 अधिवक्ताओं से 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने और कारण बताने को कहा गया है।
नोटिस प्राप्त करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष पांडे ने बताया कि उन्हें निर्धारित समय के भीतर जिला न्यायाधीश के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश मिले हैं और वे समयसीमा के भीतर अपना स्पष्टीकरण दाखिल करेंगे। अब इस मामले में सभी की निगाहें अधिवक्ताओं के जवाब और हाईकोर्ट की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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