धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास मौजूद लोगों के दिल दहल उठे। देखते ही देखते ट्रक अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग तोड़ता हुआ सड़क के दूसरी ओर पलट गया। मंजर ऐसा था कि हर किसी की सांसें थम गईं—क्योंकि उस ट्रक में सिर्फ सामान ही नहीं, बच्चों समेत पूरा परिवार सवार था।
चालक शाहनवाज (43), निवासी बक्सर (बिहार), अपने परिवार—महिलाओं और छोटे-छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहा था। हादसे के बाद पलटे ट्रक के भीतर चीख-पुकार मच गई। बच्चे सहमे हुए थे, महिलाएं दहशत में थीं। लेकिन कहते हैं न, जिसे ऊपर वाला बचाए उसे कोई नहीं मार सकता।
सूचना मिलते ही बरौंधा चौकी इंचार्ज संजय कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। हालात बेहद गंभीर थे—ट्रक के अंदर लोग फंसे हुए थे।
पुलिस ने बिना समय गंवाए ट्रक का शीशा तोड़ा और एक-एक कर सभी को बाहर निकाला। उस पल जब बच्चे सुरक्षित बाहर आए, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था कि इतनी भीषण दुर्घटना के बावजूद किसी को खरोंच तक नहीं आई।
हादसे के बाद कुछ देर के लिए हाईवे पर अफरा-तफरी और जाम की स्थिति बन गई। बाद में हाइड्रा मशीन की मदद से ट्रक को सीधा कराया गया और आवागमन सामान्य हुआ।
घटना के बाद चालक शाहनवाज की आवाज में दर्द और चिंता साफ झलक रही थी। उन्होंने बताया कि घाटी वाले इलाकों में टायर अक्सर गर्म हो जाते हैं। पहले सड़क किनारे पेड़ों की छांव में गाड़ी रोककर टायर ठंडे कर लिए जाते थे, लेकिन अब फोरलेन निर्माण में पेड़ कट जाने से यह सहारा खत्म हो गया।
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