चुनार पुलिस पर फर्जी कट्टा फैक्ट्री केस का बड़ा आरोप 3 महीने से निर्दोष युवक जेल में सड़ रहा, चार्जशीट तक नहीं भेजी; परिवार ने इंस्पेक्टर अजय सेठ समेत 7 पुलिसकर्मियों की संपत्ति जब्त कर जेल भेजने की मांग की

मिर्ज़ापुर, अप्रैल 2026
चुनार थाने की पुलिस पर फर्जी कट्टा फैक्ट्री केस में निर्दोष युवक को 3 महीने से जेल में बंद रखने, फर्जी सबूत गढ़ने और संपत्ति से अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने आज SP मिर्ज़ापुर, DGP उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री कार्यालय और NHRC को विस्तृत एप्लीकेशन भेजकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई, संपत्ति जब्ती और गैर-जमानती FIR की मांग की है।परिवार के अनुसार, FIR नंबर 0167/2024 में थाना चुनार पुलिस ने एक युवक पर “कट्टा बनाने की फैक्ट्री” चलाने का झूठा आरोप लगाया। हैरानी की बात यह है कि FIR में खुद लिखा है – “जनता का कोई गवाह नहीं”। युवक के घर से न कोई कट्टा बरामद हुआ, न फैक्ट्री, न कोई औजार। बावजूद इसके पुलिस ने उसे 3 महीने से जेल में सड़ाया जा रहा है। 90 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन CrPC की धारा 173 के तहत चार्जशीट अभी तक कोर्ट में दाखिल नहीं की गई।परिवार ने आरोप लगाया कि फर्जी बरामदगी दिखाने के लिए HC हरिकेश सिंह, HC नागेंद्र सिंह और SI नरेंद्र सिंह ने फर्द पर फर्जी साइन किए। इसके अलावा इंस्पेक्टर अजय सेठ, कांस्टेबल अमित, नवरत्री राव और वीरेंद्र सिंह भी इस साजिश में शामिल बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस ने युवक के घर से 7000 रुपये की संपत्ति का रेट बताया, लेकिन सिर्फ 1400 रुपये का रसीद दिखाया। बाकी 5600 रुपये हड़प लिए गए।एप्लीकेशन में परिवार ने 14 सूत्री मांग रखी है, जिसमें शामिल हैं:इंस्पेक्टर अजय सेठ गैंग के खिलाफ धारा 330, 354, 452, 506, 201, 195, 217, 167, 467, 471, 34 IPC + PC Act की धारा 7/13 + SC/ST Act की धारा 3(1)(r)(s) के तहत तत्काल FIR दर्ज हो।
सभी 7 पुलिसकर्मी तुरंत सस्पेंड व बर्खास्त किए जाएं।
फर्जी FIR 0167/2024 और कट्टा फैक्ट्री केस रद्द किया जाए।
युवक को CrPC 167(2) के तहत डिफॉल्ट बेल पर तुरंत रिहा कर 10 लाख रुपये मुआवजा दिया जाए।
CBI जांच कराई जाए।
थाने का CCTV फुटेज और CDR जब्त किया जाए।
पीड़ित सरिता, काजल और योगेश को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए।
पुलिस की चल-अचल संपत्ति की विजिलेंस जांच कर PC Act 13(1)(e) के तहत जब्त की जाए।
इनके वेतन से 25 लाख रुपये काटकर पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया जाए।
गैर-जमानती वारंट जारी कर सभी दोषी पुलिसकर्मियों को जेल भेजा जाए।
SP मिर्ज़ापुर की भूमिका की भी जांच हो कि 4 शिकायतों के बावजूद एक्शन क्यों नहीं लिया गया। पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी और आवास दिया जाए।परिवार का आरोप है कि यह साफ तौर पर “कस्टोडियल टॉर्चर + मालिसियस प्रॉसिक्यूशन” का मामला है। उन्होंने कहा, “3 महीने हमारा बेटा जेल में सड़ रहा है। अब पुलिस वालों की बारी है। उनकी संपत्ति जब्त हो, वेतन से वसूली हो और वे जेल जाएं।”एप्लीकेशन रजिस्टर्ड डाक से भेज दी गई है। परिवार ने DLSA चुनार (05442-252368) से भी संपर्क किया है ताकि हाईकोर्ट में 482 CrPC के तहत रिट याचिका दायर की जा सके और युवक को तुरंत डिफॉल्ट बेल मिल सके।यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस में फर्जी मुकदमों और वसूली के बड़े नेटवर्क को उजागर करने वाला माना जा रहा है। NHRC और मुख्यमंत्री कार्यालय से अब सख्त कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

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