इस पवित्र मौके पर हाफिज ने पूरी तन्मयता और खूबसूरत अंदाज में तरावीह की नमाज अदा कराते हुए पूरा कुरान पाक मुकम्मल कराया। जैसे ही कुरान मुकम्मल हुआ हर शख्स खुदा की रहमतों में डूबा नजर आया।
तरावीह के मुकम्मल होने के बाद नमाजियों ने हाफिज साहब को फूल-मालाएं पहनाकर दिल से मुबारकबाद दी। लोगों ने एक-दूसरे से मुसाफा कर भाईचारे और मोहब्बत का पैगाम दिया। उस पल मस्जिद का हर कोना इंसानियत, एकता और प्रेम की मिसाल बन गया।
इसके बाद कारी जावेद साहब ने हाथ उठाकर जो दुआ की, उसने हर दिल को छू लिया। उन्होंने न सिर्फ आलम-ए-इस्लाम बल्कि पूरे देश में अमन, भाईचारा, तरक्की और खुशहाली के लिए दुआ मांगी। दुआ के दौरान कई आंखें नम हो गईं, जैसे हर कोई अपने गुनाहों की माफी और बेहतर जिंदगी की उम्मीद लिए खुदा से जुड़ गया हो।
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