नए आपराधिक कानूनों पर मंथन, पांच जिलों के अधिवक्ता सेमिनार में जुटे

नए आपराधिक कानूनों पर मंथन, पांच जिलों के अधिवक्ता सेमिनार में जुटे


बांदा। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के लागू होने के बाद महिलाओं से जुड़े मामलों और न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर रविवार को जिला अधिवक्ता संघ सभागार में एक दिवसीय विधिक सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन वानांगना संस्था की ओर से किया गया, जिसमें बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और फतेहपुर के करीब 90 अधिवक्ताओं ने भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वानांगना की निदेशक पुष्पा शर्मा ने किया। इस दौरान रिसोर्स पर्सन अधिवक्ता अंचल गुप्ता, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विमल कुमार सिंह, महासचिव राजेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष सुशील कुमार सिंह और बोर्ड सचिव दीप्ता भोग को सम्मानित किया गया।

संस्था की प्रतिनिधि शबीना मुमताज ने बताया कि वानांगना पिछले 35 वर्षों से महिलाओं के खिलाफ हिंसा, महिला अधिकारों और न्याय तक पहुंच के मुद्दों पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सेमिनार का उद्देश्य बीएनएस-बीएनएसएस के प्रभावों तथा भरण-पोषण और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में कानूनी रणनीतियों पर चर्चा करना है।

रिसोर्स पर्सन एवं लखनऊ हाईकोर्ट की अधिवक्ता अंचल गुप्ता ने महिलाओं के भरण-पोषण और संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को महिलाओं को कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम के मामलों में डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट (डीआईआर) मिलने में होने वाली देरी का भी मुद्दा उठाया।

सेमिनार में विभिन्न जिलों से आए अधिवक्ताओं ने महिला मामलों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे मामलों में कानूनी जानकारी के साथ संवेदनशील दृष्टिकोण भी जरूरी है।

बोर्ड सदस्य दीप्ता भोग ने कहा कि महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सामाजिक संस्थाओं एवं अधिवक्ताओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने महिलाओं के अधिकारों और नए कानूनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया। आभार बोर्ड सदस्य कविता बुंदेलखंडी ने व्यक्त किया।

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